Tag: anil trivedi
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मत विभाजन का रूकना २०२४ में महत्वपूर्ण निर्णायक मुद्दा है!
भारतीय चुनाव सीधे-सीधे केवल अंक गणित की तरह नहीं होता है। भारतीय चुनाव में एक पक्षीय चुनाव परिणाम भी आते रहें हैं तो खण्डित जनादेश भी आये हैं। आजादी आन्दोलन के बाद स्वाधीनता मिलने पर शुरुआती दौर में भारतीय राजनीति में चुनाव परिणाम एक पक्षीय ही रहे ।प्रायः सत्तारूढ़ कांग्रेस के पक्ष में ही रहे।…
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चुनावी राजनीति असंभव संभावनाओं का अनोखा खेल है!
इन्दौर लोकसभा क्षेत्र में नोटा का सवाल २०२४की चुनावी राजनीति में सबसे बड़ा बवाल बन गया है! चुनाव पूर्व किसी भी मतदाता या चुनावी राजनैतिक विश्लेषक या व्याख्याकार के मन के किसी कोने में भी यह सवाल नहीं था कि इन्दौर में नोटा इतना चर्चित हो जावेगा या नोटा में इतनी बड़ी प्रतिरोध क्षमता छिपी…
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एक स्वर – एक रस, जीवन नहीं जड़ता हैं !
जीवन एकांगी नहीं बहुआयामी ऊर्जा हैं। चिंतन मनन और सृजन भी अनन्त हैं। जीवन बन्धन मुक्त ऊर्जा का अविरल प्रवाह हैं। पंचतत्व के मेल से जीवन का अंतहीन साकार स्वरूप प्रगट हुआ हैं। अंतहीन या अनन्त विविधताओं का सिलसिला ही हमारी जिंदगी या धरती का सनातन सत्य है।हम सब जो भी जिस भी रूप स्वरूप…
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भारतीय शहरीकरण आजादी के बाद कहां से कहां तक
भारत की आजादी के अमृत महोत्सव में ७५वी वर्षगांठ हमने पन्द्रह अगस्त २०२२को मनाई। आजाद भारत के पचहत्तर सालों में हमारे देश के शहरों में क्या कुछ बदलाव हुआ वह आजाद भारत में शहरी बसाहटों का इतिहास है। १९४७से२०२२के बीच देश के सभी शहरों में बड़ा बदलाव हुआ। चूंकि मैं मध्यप्रदेश के इन्दौर में जन्मा…
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घुमक्कड़ी, याने आनन्द का सतत प्रवाह
कुदरत ने हम सब को घुमक्कड़ी करने के लिये ही दो पैर दिये हैं।पर ज्ञान विज्ञान और तकनीक के विस्तार ने पैर पैदल घुमक्कड़ी को पीछे धकेल कर सुबह शाम के एक रस पैदल टहलने की रस्म अदायी में बदल दिया हैं।एक जोड़ी मनुष्य के पैरों ने धरती के चप्पे चप्पे पर अपनी पद छाप…
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आजादी आंदोलन, वे लोग वे बातें
भारत की आज़ादी के आन्दोलन को जीवन में समग्रता से आजादी की समझ के विस्तार का कालखण्ड़ भी माना जा सकता हैं।आजादी के आन्दोलन से हमारे लोकमानस ने जीवन के विभिन्न सवालों को हल करने में सत्य और अहिंसा को कैसे निजी और सार्वजनिक जीवन का अंग बनाया जाय इसे समझने का प्रयास किया। यह…
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भारत में सबसे ताकतवर शक्ति कौन सी हैं ?
इन दिनों मन में उठा एक सहज और बुनियादी सवाल यह हैं कि भारत में सबसे ताकतवर शक्ति कौन सी हैं? प्रायः इसका उत्तर शाय़द एकदम यहीं आवेगा की सत्तारूढ़ जमात और उसके सहयोगी या आनुषंगिक संगठन या समूह आज के भारत में सबसे ताकतवर शक्ति हैं।पर देखा जाय तो स्पष्ट रूप से यह सही…
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बड़े शहरों में निरापद कानून व्यवस्था पुलिस प्रशासन की प्रणाली बदल से नहीं नागरिक सम्मान और सार्वजनिक जीवन की व्यापक समझ से संभव है।
इन्दौर और भोपाल की शहरी सामाजिक राजनैतिक प्रशासनिक और व्यावसायिक तासीर में जमीन आसमान का अंतर हैं। फिर भी बिना किसी पूर्व तैयारी के दोनों शहरों के शासन प्रशासन की कमान पुलिस कमिश्नर को सौंपने की घोषणा राज्य सरकार की खासकर मुख्यमंत्री की बिना तैयारी के घोषणा ही मानी जावेगी। पिछले दो-तीन दशकों से म.प्र.के…
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एक दम शिवजी की बारात हैं हमारा इन्दौर !
इन्दौर म.प्र.का सबसे बड़ा शहर हैं पर मन से कस्बाई मानसिकता का भोला भंडारी हैं ,कभी गरम तो कभी नरम। लगातार खाता पीता – रोता गाता शहर हैं। यहां दिन रात उत्सव-तमाशेबाजी से फुर्सत ही नहीं हैं। तमाशबीन लोगऔर झांकी बाज़ आगेवान यहां की शान हैं। यहां सार्वजनिक चुप्पी और खुद का गुणगान भरपूर है।इन्दौर…
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करोना से उपजे सवालों के उत्तर हम सब खोजें
करोना ने हमारी जिन्दगी को लेकर जो सवाल खड़े किये हैं उनका समाधान भी हमें ही खोजना होगा।इन सवालों को टाला नहीं जा सकता हैं कि यह विशेषज्ञों का काम हैं ,हमारा नहीं । इन सवालों का कोई विशेषज्ञ नहीं हैं। हम सब करोना स्कूल के के.जी.वन टू के बच्चे हैं।हमें सोचना और समाधान…