राजनैतिक जेल जीवन को प्रायः नागरिक आजादी का हनन या दमन की तरह ही देखा जाता है। पर अब तक दुनिया भर में असंख्य मनुष्यों को राजनैतिक कारणों से जेल यात्रा पर जाने का मौका मिला ।उनके कारागार जीवन में मानवीय मूल्यों के हनन , अन्याय के साथ ही आध्यात्मिक साहित्य और दर्शन के सृजन की कई अनूठी कहानियां भी शामिल है। आजादी आन्दोलन में विदेशी हुकूमत की जेल में और आजाद भारत में देशी हुकूमत द्वारा बड़े पैमाने पर सम्पूर्ण क्रान्ति आन्दोलन के राजनैतिक सामाजिक कार्यकर्ता लंबी जेल यात्रा पर गए। शांति व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने हेतु राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा राजनैतिक सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी राजनीतिक दलों के नेतृत्व को जेल भेजा जाना कोई नयी बात नहीं थी।
आज से पचास साल पहले लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में सम्पूर्ण क्रान्ति आन्दोलन में युवा अवस्था में पूर्ण कालिक रूप में निरन्तर सक्रिय भूमिका निभाने और इन्दौर शहर और मध्य प्रदेश स्तर पर छात्र युवा संघर्ष समिति और जनसंघर्ष समिति में पदभार होने से मुझे २५जून १९७५की आधी रात को घोषित आपातकाल लागू होने पर १९माह तक मीसा के तहत नजरबंद रहने का अवसर मिला। मेरी मां श्रीमती कलावती त्रिवेदी को सन् १९३३मेअजमेर में सत्याग्रहीयो के साथ अजमेर में जूलुस निकालने पर तीन माह की सजा हुई। वे अजमेर सेन्ट्रल जेल में रही। मेरे पिता श्री काशिनाथ त्रिवेदी १९४२में आजादी आन्दोलन में सक्रिय भूमिका के कारण२९माह तक नागपुर केन्द्रीय कारागार में नजरबंद रहे। स्वाधीनता सेनानी दम्पति का पुत्र होने से शायद मेरे अन्तर्मन में जेल यात्रा को लेकर रोमांचित करने वाली उत्सुकता थी। इसलिए जब संयोगितागंज थाने से टीआई श्री देवकीनंदन अग्रवाल मुझे मीसा के तहत गिरफ्तार करने आए तो पिताजी ने कुंकुम का तिलक लगाकर उनका स्वागत किया और उन्होंने पिताजी को प्रणाम किया पिताजी ने उन्हें कहा बैठिए प्रार्थना करते हैं। श्री अग्रवाल भी हमारे परिवार के साथ दरी पर बैठ गए और हम सब ने गांधी जी के आश्रम की सांयकालीन प्रार्थना की। प्रार्थना के बाद मैंने पूछा एक हफ्ते बाद मेरी विधि अंतिम वर्ष की परिक्षा है मैं अपनी विधि की पुस्तकें रख लूं। मुझे कहा आप जो भी पुस्तकें रखना चाहते है रख लिजिए। मैंने एक अटेची में विभिन्न विषयों की कई पुस्तकें और एक होलडाल में अपने कपड़े बिस्तर को रखा और उठा कर सबको प्रणाम कर बाहर आया। बाहर आकर “सच कहना अगर बगावत है तो समझो हम भी बागी हैं। “और लोकनायक जयप्रकाश जिन्दाबाद के नारे लगाए और पुलिस की जीप में बैठा।रात नौ बजे जिला जेल इन्दौर में प्रवेश किया और उन्नीस माह मीसा के तहत नजरबंद रहा। मैंने आपातकाल में ही अपनी वकालत की परिक्षा प्रथम श्रेणी में पास की।जेल में ही मेरा एम.ए.मनोविज्ञान का विश्वविद्यालय में सर्वप्रथम रहने वाले छात्र को मिलने वाला स्वर्ण पदक भी जेल में मिला।
आपातकाल में देश भर में आन्दोलन का करीब करीब समूचा राजनीतिक नेतृत्व मीसा के तहत नजरबंद कर दिया गया। मूल अधिकार निलंबित हो गए प्रेस पर सेंसरशिप लग गई।जब मैं गिरफ्तार किया गया तो उस समय मैं सबसे कम आयु का करीब बाईस वर्ष का था बाद में मुझसे एक दो साल छोटे नौजवान भी नजरबंद हुए।देश भर में हजारों आन्दोलनकारी विपक्षी नेता कार्यकर्ता नजरबंद कर दिए गए। एक बाईस साल के नौजवान को उन्नीस माह तक मध्यप्रदेश के करीब करीब सभी राजनीतिक धाराओं के प्रमुख विपक्षी नेताओं का निकट सानिध्य मिले तो उसकी राजनीतिक समझ का कितना विस्तार हुआ होगा यह राजनीतिक नजरबंद रहे लोग ही जानते समझते हैं। राजनीतिक गतिविधियों के कारण जेल यात्रा से जो राजनैतिक ऊर्जा निकलती है वह हमारी लोकतांत्रिक राजनीति में स्पष्ट दिखाई देती है। आजादी के बाद से लेकर विभिन्न विपक्षी दल सतारूढ़ दल को सत्ता से हटाकर विपक्षी राजनीतिक दलों को एकजुट करने में इस उन्नीस माह की जेल यात्रा के कारण सफल हुए।
उन्नीस माह की जेल यात्रा भारतीय राजनीति के विपक्षी राजनीतिक दलों का एक व्यापक राजनीतिक समझदारी के साथ मिलकर राजनीतिक गतिविधियों को संचालित करने के एक महाशिविर की तरह इतिहास में दर्ज हो गया है। आपातकाल से निकली विपक्षी राजनीतिक दलों की रणनीति ने भारतीय राजनीति की तासीर को बदल दिया। आपातकाल के बाद से भारत की राजनीति एक दल के वर्चस्व की नहीं रही वरन् सभी राजनीतिक धाराओं के राजनैतिक दलों को सत्ता में भागीदारी करने का अवसर मिला है। भारत की संसदीय राजनीति में मोर्चा या गठबंधन सरकार का उदय होना भारतीय राजनीति में आपातकाल का महत्वपूर्ण योगदान है।पचास साल बाद जब अपने उन्नीस माह के जेल जीवन के बारे में सोचते हैं तो मन में यह बात आती है कि आपातकाल में हजारों लोगों की नागरिक आजादी के बलिदान के कारण हम देश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की दिशा में आगे बढ़ सके। जेल यात्रा से निकली राजनीतिक ऊर्जा ने मेरी और मेरे जैसे सम्पूर्ण क्रान्ति आन्दोलन के हजारों नौजवानो की राजनैतिक और सामाजिक समझ को विकसित करने एवं विस्तार देने में मदद की है।इस दृष्टि से आपातकाल के घटनाक्रम से आजाद भारत की एक पीढ़ी के नौजवानो को परिवर्तन धर्मा राजनीति से जेल यात्रा द्वारा प्रत्यक्ष साक्षात्कार कर सार्वजनिक जीवन की बुनियादी समझ बढ़ाने का अवसर मिला जो सामान्य काल में देश समाज और नौजवानों को नहीं मिल पाता है। परिवर्तन धर्मा राजनीति में व्यक्ति गत सुख दुःख के बजाय लोगों के सुख-दुख के लिए काम करना बुनियादी बात मानी जाती है। यही लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रान्ति आन्दोलन का देश के परिवर्तन धर्मा नौजवान पीढ़ी को स्पष्ट संदेश था।