जब देश आजाद हुआ तब देश के साथ इन्दौर में भी राजनीतिक सोच समझ और गतिविधियों में सद्भाव सहयोग और उत्साह का वातावरण दिखाई देता था।आज के कालखंड के मुकाबले दैनंदिन राजनीतिक गतिविधियों की तासीर में जमीन आसमान का अंतर आ गया है। इन्दौर ही क्या समूची देशव्यापी जीवन शैली में जिस तरह बदलाव हुआ है वैसे ही पुराने और आज के इन्दौर की राजनीति में भी जो बदलाव हुआ है उससे एक तरह से समूचा जन जीवन और राजनैतिक परिदृश्य ही बदल गया है। आजादी के एकदम बाद के दो तीन दशकों तक इन्दौर की सभी राजनीतिक धाराओं के नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की राजनीति सोच और समझ के साथ ही कार्यशैली पर स्वतंत्रता आन्दोलन के तौर तरीकों का गहरा प्रभाव दिखाई देता था। चाहे सत्ता के समूह से जुड़े राजनीतिक धाराओं का नेतृत्व हो या उभरते हुए विपक्षी धाराओं का राजनैतिक नेतृत्व और कार्यकर्ताओं का समूह हो दोनों ही जनजागरण मूलक राजनीतिक सामाजिक सद्भाव की गतिविधियों को ही अपनी राजनीतिक गतिविधियों का मूल आधार मानते रहे।
आजादी के बाद के कालखंड में चाहे सत्ता से जुड़े राजनीतिक समूह हो या विपक्षी राजनीतिक धाराओं के समूह हो दोनों ही जनजागरण पर विशेष ध्यान या जोर देते थे। इस का नतीजा यह हुआ था की जनता के बीच से ही नया नेतृत्व उभरता था जिसे आम जनता और सभी धाराओं के नेता कार्यकर्ता सम्मान की दृष्टि से ही देखते थे और एक दूसरे का निजी और सार्वजनिक रूप से सम्मान करते थे राजनैतिक और सामाजिक सद्भाव लोकजीवन में रचा-बसा था। इस प्रक्रिया में मुख्य भूमिका शहर के विभिन्न चौराहों पर हर छोटे-बड़े मु्द्दों को लेकर होती रहने वाली आमसभाओं और विचार गोष्ठियों की एक तरह से थी। क्योंकि तब एक दूसरे को समझने और सुनने और प्रत्यक्ष मिलते-जुलते रहने के अवसर सुलभ थे।इन्दौर में विभिन्न स्थानों पर राजनैतिक दलों द्वारा नियमित रूप से होने वाली आम सभा राजनीतिक धाराओं के कार्यकर्ताओं के साथ ही आम जनमानस के लिए भी एक तरह से राजनीतिक समझ की पाठशाला की तरह ही थी।
आज दो तीन दशकों में जिस तरह से इन्दौर में महानगरीय बसाहट का अराजक विस्तार हुआ है तब से राजनीतिक गतिविधियों में राजनेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका गौण हो गयी हैं प्रत्यक्ष मिलना जुलना कम हो गया और टेन्ट हाऊस से भी आगे बढ़कर अब इवेंट मैनेजमेंट समूहों के हाथ में सारी छोटी-बड़ी राजनैतिक गतिविधियों का संचालन होने लगा है। राजनेताओं और कार्यकर्ताओं को प्रत्यक्ष करने को कुछ बचा नहीं है। अच्छा खासा ही नहीं भव्यता वाला मंच या मैरिज गार्डन में राजनीतिक समारोह आयोजित होते हैं बड़े बड़े भोजन आयोजन सामान्य रूप से होने लगे हैं हार समर्पण और वीडियो शूट का अंतहीन सिलसिला हर जगह है पर लोगों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करने वाले राजनीतिक धाराओं के नेता और कार्यकर्ता लुप्त हो गये हैं।अब इन्दौर की राजनीति में आमचुनावों में भी आम सभाएं लुप्त प्रायः हो गई है। राजनीति का मुख्य कर्म सड़को पर नेता और कार्यकर्ताओं के छोटे बड़े होर्डिंग लगाना, राजनीतिक नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के जन्मदिन के समारोह गली मोहल्लों में आयोजित करना और बारह मास तरह तरह के भोजन भंडारे और स्वागत मंच लगाना लगवाना नये इन्दौर की नई मुख्य राजनीति बन गई है।
राजनीति का अर्थ चुनाव की साम,दाम दंड भेद से तैयारी करते रहना नहीं होता है। राजनीति का अर्थ है आम जनता के कोटी कोटी अरमानों में रंग भरने का आजीवन संकल्प है। राजनीति का मूल अर्थ किसी तरह राज-काज को हासिल करना नहीं होकर ,हर काल खंड की नई पीढ़ी को देश और दुनिया के जनजीवन में हो रहे नये नये परिवर्तन से पीढ़ी दर पीढ़ी अवगत करवाते रहने का अंतहीन सिलसिला बना रहना है।