करोना ने हमारी जिन्दगी को लेकर जो सवाल खड़े किये हैं उनका समाधान भी हमें ही खोजना होगा।इन सवालों को टाला नहीं जा सकता हैं कि यह विशेषज्ञों का काम हैं ,हमारा नहीं । इन सवालों का कोई विशेषज्ञ नहीं हैं। हम सब करोना स्कूल के के.जी.वन टू के बच्चे हैं।हमें सोचना और समाधान करना हैं।।हमें निरापद जीवन के समाधान खोजना ही होंगे।करोना से पहले जिन बातों को हम सोचते भी नहीं थे उनका उत्तर खोजें बिना अब हम निजी और सार्वजनिक जीवन निरापद रूप से जी नहीं सकते।करोना काल ने हमें सिखाया है संयम और शांतिमय जीवन ही अचूक उपाय है। करोना काल हम मनुष्यों को सिखा रहा हैं कि अभी तक जैसे जीते आये हैं वैसे ही जीते रहना आगे के जीवन में जीना निरापद नहीं हैं।अकारण भागादौड़ीवाली, भीड़ भरी ,मनमानी समारोही जीवन शैली करोना की महामारी को लोकव्यापी बनाने वाली सिद्ध हुई हैं।अब चौबिसों धण्टे बारह महिने सतर्क और विवेकपूर्ण निजी और सार्वजनिकजीवन की गतिविधियां , प्राणवायु की तरह जीवन का अनिवार्य तत्व बन गयी हैं।घर में शांतऔर खुश रहना है और बाहर भीड़ के लिये लालायित नहीं होना हैं।करोना ने मनुष्य जीवन की सारी विशिष्टताओं और लापरवाहियों को भूलाकर जीवन में संयम शांत्तिऔर शिष्टता को कभी न भूलने का दर्शन याद दिलाया हैं।आप कोई भी हो आयु,कद या पद में छोटे या बड़े ,पैसे वाले या विपन्न,राष्ट्राध्यक्ष या राहगीर,स्त्री या पुरुष,प्रशासक या चिकित्सक, करोना ने दुनिया के सभी मनुष्यों के कद,पद,पैसे से लेकर जीवन में मनुष्य द्वारा बनायी हर विशिष्टता को जीवन की सुरक्षा के लिये जीवन से बिदाकर दिया।विशिष्टता का लिहाज करना करोना ने खत्म कर दिया।करोना काल में स्वस्थ प्रसन्न और सुरक्षित जीवन चाहते हो तो अपने आपको सामान्य मनुष्य की तरह शान्त सतर्क और भीड़ से दूर अपने जीवन में आये आसन्न संकट से निपटने के लिये तैयार रहो और अपने काम में रमे रहो। शांत संयमित मनुष्य समाज ही करोना वायरस की सारी हलचलों से निपट सकता है। हमारे जीवन की हलचलें निरन्तर चलती रहे इसलिये हलचलों को आत्मनियंत्रित और विवेकपूर्ण बनाये रखने केअलावा मनुष्यों के सामने कोई सरल सहज उपाय उपलब्ध नहीं हैं।