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धरती के सम्बन्ध में एक भी मनुष्य न तो बाहरी है न ही धुसपैठिया
‘सबकी धरती ,सब धरती के ‘भाव से दूर क्यों है मनुष्य ? असंख्य ग्रह नक्षत्रों व तारामंडल को लेकर हमारे मन में कभी यह विचार नहीं आता की यह आकाशगंगा किसकी है? धरती को लेकर भी मेरे तेरे का भाव भी हमारे मन में नहीं आता।तो फिर देश प्रदेश ,शहर गांव, समाज जाति, धर्म भाषा,…