सर्वोदय, सम्पूर्ण क्रांति और लोकनायक के साथी रहे स्वाधीनता सेनानी एवं लोकतंत्र सेनानी दादाभाई नाईक ।

आपातकाल में १९माह तक इन्दौर जिला जेल में मध्यप्रदेश के नौजवान पीढ़ी से लेकर स्वाधीनता संग्राम के भागीदार पीढ़ी के भागीदार वरिष्ठ आयु के सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ता की एक अच्छी खासी श्रृंखला भी शामिल थी। जिसमें आयु एवं अनुभव में अग्रणी सर्वोदय आन्दोलन के वरिष्ठतम रचनात्मक कार्यकर्ता, विसर्जन आश्रम के अध्यक्ष एवं स्वाधीनता सेनानी श्री दादाभाई नाईक भी १९ माह तक जिला जेल इन्दौर में नजरबंद रहे। दादा भाई नाईक स्वाधीनता आंदोलन में महात्मा गांधी के संपर्क में आने के बाद पूरी तरह से सक्रिय रहते हुए आजादी आंदोलन में जेल में भी लंबे समय नजरबंद रहे। आजादी आने पर सर्वोदय और रचनात्मक कार्य में आजीवन लगे रहे। हिंदी, मराठी, अंग्रेजी और संस्कृत के प्रकांड विद्वान दादा भाई खेती खासकर कपास की खेती सहित खादी ग्रामोद्योग पर गहरी पकड़ रखते थे। कपास की खेती पर दादाभाई की पुस्तक बहुत चर्चित रही है। वेद उपनिषद, गीता एवं संस्कृत भाषा के गूढ़ ग्रंथों का गहरा अध्ययन दादाभाई के जीवन की विशेषता थी । इसके साथ ही  योगासन का गहरा दैनिक अभ्यास दादाभाई के जीवन चर्या का अभिन्न अंग था। पचहत्तर वर्ष की आयु में भी दादाभाई सहजता से शीर्षासन मनोयोग पूर्वक करते थे।सर्वोदय आन्दोलन और संत विनोबा भावे के भूदान आंदोलन को लेकर दादाभाई ने अविभाजित मध्यप्रदेश की दो बार पदयात्रा की। सन् १९६०में संत विनोबा भावे की मध्यप्रदेश यात्रा के प्रबंध और संचालन करने वाले प्रमुख रचनात्मक कार्यकर्ताओं में से दादाभाई एक थे। इन्दौर में सन् १९६०में संत विनोबा भावे एक माह इन्दौर में रहे और इन्दौर में सर्वोदय विचार के कार्य हेतु विसर्जन आश्रम की स्थापना संत विनोबा भावे ने की तो आश्रम के संचालन का दायित्व विनोबा जी ने दादा भाई नाईक को सौंपा।१९७३-७४में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने बिहार में नौजवानों को आव्हान कर सम्पूर्ण क्रांति आन्दोलन को शुरू किया तो दादाभाई नाईक ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पूरी तरह आन्दोलन में भागीदारी कर आन्दोलन का नेतृत्व प्रदान किया। दादा भाई को मध्यप्रदेश की जनसंघर्ष समिति के संयोजक का दायित्व सौंपा गया। इन्दौर में विसर्जन आश्रम संपूर्ण क्रांति आन्दोलन का केंद्र था। इन्दौर में आन्दोलन की गतिविधियों के संचालन की लगभग सभी बैठक, सम्मेलन में दादाभाई की सक्रियता प्रेरणादायक रही। लोकनायक जयप्रकाश की चिमनबाग मैदान पर हुई एतिहासिक आमसभा की अध्यक्षता दादाभाई नाईक ने की थी। लोकनायक जयप्रकाश की चिमनबाग मैदान की आमसभा आज तक इन्दौर में हुई आमसभाओं में सबसे बड़ी सभा मानी जाती है।

   २जुलाई १९७५की शाम वयोवृद्ध दादा भाई नाईक को विसर्जन आश्रम से संयोगितागंज पुलिस थाने के थाना प्रभारी श्री देवकीनंदन अग्रवाल ने शाम को विसर्जन आश्रम स्थित निवास से मीसा के तहत नजरबंद करते हुए उन्हें संयोगितागंज पुलिस थाने में बैठाया। दादाभाई को नजरबंद कर श्री देवकीनंदन अग्रवाल साजन नगर में मुझे भी (अनिल त्रिवेदी को) मीसा के तहत नजरबंद कर संयोगितागंज पुलिस थाने लाये। वहां दादाभाई नाईक पहले से ही नजर बंद कर बैठाएं हुए थे। मैंने दादा भाई के चरणस्पर्श किए और रात करीब नौ साढ़े नौ बजे के लगभग हम दोनों को जिला जेल इन्दौर में ले जाया गया। जेल में मालवा निमाड़ के काफी राजनीतिक कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता मीसा के तहत नजरबंद कर पहले से रखें गये थे। इन्दौर जिला जेल में आपातकाल लागू होने से विशेष कर मालवा निमाड़ सहित समूचे मध्यप्रदेश से मीसा के तहत नजरबंद किए गए लोकनायक जयप्रकाश नारायण प्रणीत सम्पूर्ण क्रांति आन्दोलन में सक्रिय रहकर कार्य कर रहे कार्य कर्ता लायें गये थे।

   जेल में दादाभाई सबसे ज्यादा आयु के मीसा के तहत नजरबंद किए गए लोगों में से एक तरह से अग्रणी थे।१९माह की इन्दौर जिला जेल एक तरह से राजनीतिक कार्यकर्ताओं का विशाल वैचारिक शिविर की तरह धीरे-धीरे बनता जा रहा था। दादाभाई नाईक जैसे तपोनिषठ स्वाधीनता सेनानी और भारतीय दर्शन परंपरा की निष्णात विभूति का लंबा सानिध्य इन्दौर जिला जेल में मीसा में नजरबंद साथियों के राजनैतिक जीवन की विशेष उपलब्धि जैसी थी। दादा भाई नाईक मितभाषी और निरंतर अध्यनरत रहने के बाद भी सबसे स्नेह से मिलते-जुलते थेऔर कार्यकर्ताओं की जिज्ञासा को पूरी प्रामाणिकता से शान्त करते थे। दादा भाई हमारे बीच एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में सदैव उपलब्ध थे जिनसे सामाजिक ताने-बाने, दर्शन, अध्यात्म, आजादी आंदोलन, सर्वोदय एवं भूदान आंदोलन सहित, खेती किसानी के साथ ही महात्मा गांधी,संत विनोबा भावे और लोकनायक जयप्रकाश सहित देश समाज की विभूतियों के संस्मरण और देश, समाज और संस्कृति के सवालों पर लंबी चर्चा का अवसर मेरी आयु के नौजवान पीढ़ी के लिए जेल यात्रा तो एक तरह से  विचार-विमर्श का अवसर ही सिद्ध हुई। मेरा विशेष सौभाग्य है कि मुझे लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति आन्दोलन में तो दादाभाई नाईक का मार्गदर्शन लगातार मिला ही साथ ही साथ जेल में नजरबंद होने से लेकर रिहा होने के दिन तक भी सानिध्य प्राप्त हुआ।जब मैं जेल में लोकमान्य तिलक का गीता रहस्य और ज्ञानेशवरी का अध्ययन कर रहा था तो कई प्रसंगों में दादाभाई का मार्ग दर्शन मिला। दादाभाई जैसी विभूति की उपस्थिति ने लंबी जेल यात्रा को शांति और तेजस्वी रूप के साथ कैसे जेल जीवन वैचारिक समृद्धि के साथ जिया जाता है यह अनोखा पाठ प्रत्यक्ष पढ़ने को मिला। वैचारिक कारण से जेल यात्रा का रोमांच लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति आन्दोलन में शामिल नौजवान और कार्यकर्ताओं की अविस्मरणीय उपलब्धि है। लोकतंत्र निखारने के लिए हुए लोकसंघर्ष में दादाभाई नाईक की सक्रिय सहभागिता और योगदान हम सब को लंबे समय तक शांत चित्त हो विपरीत समय और परिस्थिति में भी सहज और सरल बने रहने की प्रेरणा देगा। दादाभाई नाईक का सादर स्मरण नमन। जयजगत।