परिचय/About me

अनिल त्रिवेदी ६ मई १९५१ को इन्दौर मध्य प्रदेश में जन्म।सन १९७४ में मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि इन्दौर वि.वि.से प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान के साथ स्वर्ण पदक प्राप्त किया।१९७५में इन्दौर जिला जेल में आपातकाल में MISA के तहत नजरबंद रहते हुए एल.एल.बी.आनर्स की परिक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।पचास वर्षों से समाचार पत्र पत्रिकाओं में स्वतंत्र मौलिक लेखन।माता पिता श्रीमती कलावती त्रिवेदी व श्री काशिनाथ त्रिवेदी दोनों स्वाधीनता संग्राम में जेल में रहे।गांधीवादी जीवन मूल्यों के साथ पले बढ़े किशोरावस्था से ही सामाजिक राजनैतिक आन्दोलनों में सक्रिय हैं।आदिवासी समाज के साथ एकाकार होकर प्राकृतिक जीवन को जीवन दर्शन मान कर सार्वजनिक जीवन में सतत सक्रिय हैं।उच्च न्यायालय में १९७७से अभिभाषक के रूप में जनहित तथा संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ के रूप में पहचाने जाते हैं।मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में हिन्दी में रिट याचिकाओं की शुरूआत कर पिछले ४४वर्षो से हिन्दी में ही विचारपूर्वक अपना अभिभाषक का सारा कार्य करते रहे हैं।मध्य प्रदेश में जनहित के मामलों को प्रारम्भ करने वाले अभिभाषक के रूप में जाने जाते हैं।चालिस वर्षों से प्राकृतिक खेती करने के साथ जन्म से ही खादी के वस्त्र ही पहनते हैं।चित्रकारी विशेषकर मुक्त हस्त रेखाकंन और छायाकंन के साथ देश विदेश में भ्रमण किया है ।नर्मदा बचाओ आन्दोलन,सर्वोदय-समाजवादी आन्दोलन से जुड़े हैं।गांधी लोहिया जयप्रकाश और विनोबा के चिन्तन से प्रभावित हो मुक्त विचार में भरोसा रखते हैं।छात्र जीवन मे सम्पूर्ण क्रांति के आन्दोलन में भागीदारी के फलस्वरूप उन्नीस माह तक इन्दौर जिला जेल में MISA के तहत नजरबंद रहे।मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लोकतंत्र सेनानी घोषित कर ताम्रपत्र प्रदान किया।कुशल वक्ता,विचारक और सादगी स्वावलम्बन और आध्यात्मिक अहिंसक जीवन के हामी अनिल त्रिवेदी का मानना है कि शब्द ही ब्रम्ह है और ब्रम्ह निशब्द है।अतःमानव का शांत भाव से अपने आप को सनातन रूप से अभिव्यक्त करना ही आत्म साक्षात्कार है।जीवन ही मनुष्य को प्रकृति का सबसे बड़ा पुरस्कार है।यह समझ ही चाहना रहित शांत एवं सृजनात्मक जीवन की आधारशिला है।